Tuesday, 6 November 2018

धर्म और त्योहार के अपमान का कारण

*सनातन त्यौहार और परंपराओं के अपमान का एक कारण - खुद आजका कथित हिन्दू *दीपावली के पावन पर्व प्रशासक समिति श्रंखला की सभी सनातन धर्मावलंबियों को हार्दिक शुभकामनाएं *सनातनियों क्या हम सबने कभी सोचा कि हिन्दू धर्म, परंपराओं और त्योंहारों का अपमान बढ़ते जा रहा है वो भी हम सनातनियों के रहते हुए... क्यों?? क्या कारण है इसका???* *इसका सबसे बड़ा कारण हैं हम खुद* *जी हां! हम खुद जो अपने धर्म परंपराओं का न सम्मान कर पाते हैं और न ही अपमान करने वालों को समझ ही पाते हैं , रोकना तो बहोत दूर की बात हैं.....* *कई दिनों से दीपावली की शुभकामनाएं सोशल मीडिया पर घूम रही हैं।।। अच्छी बात है लोग शुभकामनाएं बढ़ चढ़कर दे रहे हैं लेकिन कुछ विशेष बातों को पूर्णतः नजरअंदाज कर ...* *क्या हिन्दू अपनी भाषा के शुभकामना देने का सामर्थ्य नहीं रखते??? क्या एक छोटासा शुभकामना संदेश भी आजका कथित हिन्दू अपने मन और बुद्धि से बनाने में असमर्थ हैं??? जिसे देखो या तो बनी बनाई व्यर्थ फ़ोटो भेजते रहते हैं या फिर किसी मूर्ख या विधर्मी का बनाया ऐसा सन्देश जो उर्दू और अंग्रेजी की गुलामी से बना हो...* * कोई आपके त्योंहारों पर रोक लगाता है तो उंसके विरुद्ध हिन्दू एक नहीं हो सकते क्योंकि हिंदुओं में सेकुलरिज्म का कीड़ा ज्यादा अंगड़ाइयां ले रहा है* * हिन्दू खुद आज वामपंथियों के जाल में फंस प्रदुषण रहित होली, दीवाली की बॉतें करता है जबकि हमारे त्योंहारों पर प्रदुषण होता भी है तो 365 दिनों का 1% भी नहीं है* * त्योंहारों पर पारंपरिक तरीकों के बजाय विदेशी बनते जा रहे है ,क्रिश्चनों की तरह मोमबत्ती और लाइटिंग जलाकर प्रयावरण की ऐसी तैसी कर रहे और प्रयावरण रक्षा का व्यर्थ ज्ञान पेल रहे हैं* *बड़े बड़े मॉल से फिजूल की लाइट ला रहे (जो नहीं जलानी चाहिए)और गरीब भारतीय दीपक बनानकर सड़कों से निराश लौट रहे ....* *पारंपरिक मिठाइयों की जगह घटिया किस्म की चॉकलेट घर लाकर त्योंहार का अपमान कर रहे हिन्दू...* *लक्ष्मी पूजा में असली लक्ष्मी सुख- शांति और सम्रद्धि को छोड़ नोटों के बंडल की पूजा कर रहे हिन्दू* *परिजनों के चरण स्पर्श करने की जगह सन्देश भेज फॉर्मेलिटी पूरी कर रहा हिन्दू (दूर वाले तो ठीक नजदीक वालो के यहां भी नहीं जाते)* *कितने कमियां गिनाऊँ कई दिन लगा जाएंगे......इतने में ही समझ यदि दिमाग लगा कर हिन्दू अपने धर्म , त्योंहार, परम्परों को समझे और मनाने लगेगा तो अपने धर्म की रक्षा में कुछ क्र ही लेगा ......* *जमीनी स्तर पर कुछ नहीं क्र सकते तो कम से कम धर्म परायण बन अपने धर्म और उससे जुड़े परम्पराओं को तत्व से समझने की कोशिश करते हुए सही तरीके से अपने जीवन में उतारें तो ये धर्म रक्षा ही होगी कहने का सीधा सा अर्थ है कि धर्म का अपमान तभी हो जाता है जब हम भारतीय होकर सामान चाइना का खरीदते हैं हम भारतीय होकर मिट्टी का दिया नहीं बल्कि चाइना की लाइट खरीदते हैं हम भारतीय होकर भी पटाखे जलाते हैं वह भी विदेशी कंपनियों के तब जाकर हमारे धर्म का अपमान होता है और अपमान करने वाले कोई दूसरे नहीं हम खुद है क्योंकि आज कितने फटाके जलते हैं और उन पर डाकू पर मां लक्ष्मी भगवान गणेश जी की फोटो लगी होती है और हम उस फोटो को पैरों में लेते हैं और नाली में डाल देंगे कचरे में डालते हैं जबकि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए हमें इन सब चीजों का विरोध करना चाहिए चलो पटाखे जलाए वह गलत बात नहीं है लेकिन ईश्वर को पैरों में लेकर आते हो सबसे बड़ी गलत बात है क्योंकि मंदिर में जाकर जिस पर के सामने हम हाथ फैलाते हैं और कुछ ही समय के बाद में उस ईश्वर को हम पैरों में लेते हैं तो क्या वह ईश्वर हमारी किसी भी दुआ को कबूल करेगा तो अपने धर्म का अपमान होने से बचाओ जय भगवान जय श्री राम

सास बहू की नोकजोक

कहा बहू ने सास से, सम्मुख है त्यौंहार। करूँ कहाँ से मै शुरू, घर की झाड़ बुहार।। पहले कमरे को करूँ, या छत कर लूँ साफ। किंकर्तव्यविमूढ हूँ, करिये माँ इंसाफ।। सासू बोली बीनणी, मानो मेरी बात। मोबाइल को साफ कर, लगी रहे दिन रात।। टिनिन टिनिन घंटी बजे, प्रतिपल ये मैसेज। पीढ़ा लाने को कहूँ, तू लाती है मेज।। पानी माँगे लाडला, तू पकड़ाती चाय। मैनें माँगा बीजणा, मिला अंगौछा हाय।। आँख गड़ी है एकटक, खोया लगता गात। आती हूँ आयी अभी, सदा एक ही बात।। तू औ मेरा लाडला, दोनो की इक जात। आपस मे बोलो नहीं, मैसेंजर पर बात।। जिस दिन तेरे नेट का, खत्म होय बैलेंस। लगता तूने खो दिया, हो सारा ही सेंस।। अद्भुत पीड़ा रामजी, इससे मुझे बचाय। सवामणी करदूँ बहू, कहे नेट को बाय।। सास और बहू के बीच में झगड़ा सदियों से चलता आ रहा है सास और बहू में 99% झगड़े होते हैं और आजकल के ट्रेंडिंग युग में सास और बहू के ऊपर बहुत से जोक्स और चुटकुले बनाए गए हैं मगर यह भी सत्य है कि कुछ जगह में सास और बहू में कितना प्यार कितना प्रेम होता है कि एक दूसरे से अलग होने के बाद सास बहू को एक दूसरे की याद भी बहुत आती है वह भी नहीं पाती है तो इस कहानी के या इस कविता के माध्यम से कम सास बहू के अंदर जो झगड़ा होता है उसको नहीं बल्कि एक प्यार को दर्शा रहे कि किस तरह से राजस्थानी और खड़ी भाषा मारवाड़ी में यह कविता बनाई है तो आप इसका आनंद लीजिए और अगर यह कविता अच्छी लगे तो कृपया आगे से आगे शेयर करें और मारवाड़ी भाषा का सम्मान करें जय हिंद जय श्री राम जय वीर तेजाजी

Sunday, 4 November 2018

दीवाली घर पे मनाये

अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं सामान से नहीं, समय देकर सम्मान जताते हैं उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

अफ्रीकी काले क्यों होते है

रोचक_जानकारी_जरूर_पढ़े क्या आपको मालूम है.. अफ्रीकन लोगों के काले रंग के पीछे क्या वजह है ? कहा जाता है के पुराने ज़माने में, एक सुल्तान ने शादी का इरादा किया तो उसने तमाम शहजादियों को जमा करके उनको कुछ बीज के दाने दिए और कहा.. तुम में से जो भी 6 माह बाद गुलाब का फूल लेकर आएगी.. वही मेरी ज़ौजा और सल्तनत की मलका होगी, 6 माह गुज़रने के बाद तमाम शाहज़ादियां हाथों में फूल उठाये महल में दाखिल हो गईं, कुछ के हाथ में सुर्ख गुलाब तो कोई पीला फूल लेकर आई थी, अल मुख़्तसर मुख़्तलिफ़ रंगों के फूल हाथों में लिए हाज़िर ए दरबार थीं, एक लड़की ऐसी भी थी जिसके हाथ में फूल नहीं था, बादशाह ने उससे पूछा तुम्हारा फूल कहाँ है ? लड़की ने सुलतान को जवाब दिया... आपने जो बीज हमे दिए थे वो गुलाब के नहीं थे, सुलतान को शहज़ादी का जवाब और उसकी सदाक़त पसन्द आई सुलतान ने उस लड़की से निकाह करके अपनी ज़ौजियत में लेलिया और उसे मलका ए सल्तनत के खिताब से नवाज़ दिया। जहाँ तक अफ़्रीकी लोगों के काले रंग का सवाल है तो यकीन जानिये... उसके बारे में मुझे खुद भी कुछ नहीं पता..!! पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Saturday, 3 November 2018

बेटी शुभ कैसे.....एक बार जरूर पढ़ें

बिटिया के लिए स्कूटर खरीदा तो लाॅटरी में निकली छह लाख की होंडा ब्रियो कार। इसलिए कहते हैं बेटियां शुभ होती हैं। ======= बेटियां परिवार के लिए कितनी शुभ होती हैं, इसका अंदाजा अजमेर के कोटड़ा स्थित पसंद नगर के निवासी और एचडीएफसी बैंक की वैशाली नगर शाखा में काम करने वाले तुलसीराम च ौधरी को मिली होंडा ब्रियो की कार से लगाया जा सकता है। तुलसीराम की बिटिया अंशुल च ौधरी बीके कौल नगर स्थित क्वीन मेरी स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा है। बिटिया के लिए च ौधरी ने अजमेर के श्रीनगर रोड स्थित अजमेर होंडा के शोरूम से गत 27 अक्टूबर को 70 हजार रुपए का होंडा स्कूटर खरीदा था, तब उन्हें सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि बिटिया का स्कूटर छह लाख रुपए की कीमत वाली कार भी दिलवा देगा। लेकिन तीन नवम्बर को होंडा स्कूटर के अधिकृत विक्रेता एसपी सहगल का फोन च ौधरी के पास और उन्हें जानकारी दी कि कंपनी की स्कीम के अनुरूप लाॅटरी में छह लाख की कीमत वाली होंडा ब्रियो कार निकली है। च ौधरी का अब खुशी का ठिकाना नहीं है। उनका मानना है यह कार बेटी की वजह से ही मिली है। वे अपनी बेटी को लक्की मानते हैं। उनके परिवार में यह पहला अवसर होगा, जब कार आएगी। च ौधरी ने भाव विभोर होकर कहा कि मैं अपनी बेटी की वजह से ही अब बैंक भी कार से जाउंगा। बेटी उनके लिए जन्म से ही शुभ रही है। उन्होंने कहा कि मैं बैंक की नौकरी में कभी भी कार खरीदने की स्थिति में नहीं था। अजमेर होंडा शोरूम के मालिक सहगल ने बताया कि पांच अक्टूबर से 30 नवम्बर तक होंडा के दुपहिया वाहन खरीदने पर कंपनी ने कार देने की स्कीम जारी कर रखी है। कंपनी के द्वारा 31 ब्रियो कार तथा पांच अमेज कार लाॅटरी के द्वारा दी जाएगी। उन्हें इस बात की खुशी है कि राजस्थान में उनका पहला शोरूम है, जहां के स्कूटर क्रेता को होंडा की ब्रियो कार भी मिलने जा रही है। अब तक इस स्कीम में पांच क्रेताओं को कार उपलब्ध हो चुकी है।

जानवर ओर उनकी परेशानियां

*लड़ाई या कठिन परिस्थिति में घिर जाने पर जानवर क्या करते हैं ?* *आईये मनोविज्ञान के अध्ययन के द्वारा इसे जानने की कोशिश करें ।* *खतरे में फंस कर जानवर तीन तरह से व्यवहार करते हैं, फाईट, फ्लाईट या फ्रीज।* *फाईट यानि लड़ना , जिसे कहते हैं, मुसीबत का डटकर मुकाबला करना ।* *फ्लाईट यानि भाग जाना । जिसे कहते हैं दुम दबाकर डरकर भाग जाना ।* *फ्रीज यानि वहीं जड़ हो जाना । जिसे कहते हैं, डर से लकवा मार जाना ।* *लड़ाई में आमना सामना होने पर कुछ जानवर लड़ना पसंद करते हैं । जैसे, शेर, भालू, हाथी आदि। चाहे दुशमन कैसा भी ताकतवर क्यों न हो, यह भिड़ जाते हैं ।* *कुछ जानवर जब ताकतवर या हिंसक जानवर से घिर जाते हैं तो जान बचाने के लिए भागना पसंद करते हैं । जैसे कि, हिरण, खरगोश, बकरी आदि।* *अब तीसरे तरह के जंतु भी होते हैं । यह जब खतरा देखते हैं तो शांत बैठ जाते हैं । जैसे कि शतुरमुर्ग खतरा देखकर रेत में सिर छुपा लेता है । कबूतर के पास यदि बिल्ली आ जाए तो अपनी आंख बंद कर लेता है। यह सोचते हैं कि मेरे आंख बंद कर लेने से मुसीबत टल जाएगी । पर वह नहीं टलती व बिल्ली शांत बैठे कबूतर को ग्रास बना लेती है ।* *🚩 हिंदू भी इन तीन प्रकार के होते हैं ।* *फाईट प्रवृति वाले यानि कट्टर हिंदु। जोकि जानते हैं विदेशी ताकतों जैसे कि इसलाम व इसाई धर्म ने हमको हिंदुस्थान में ही दबाना शुरू कर दिया है ।अतः कट्टर हिंदू इनसे अपने धर्म या जीवन को बचाने के लिए संघर्ष करते हैं । यह दूसरे धर्म की बुराईयों की बात करने से नहीं डरते।* *दूसरे होते हैं फ्लाईट या कायर हिंदू, जिन्हें हम सेकुलर कहते हैं । यह कहीं भी आमना सामना होने पर सेकुलरिज्म की दुहाई देंगे व अपनी कायरता को सेकुलर के आवरण में छुपाने का प्रयास करेंगे। यह कहेंगे कि मुसलमान तो एसे ही होते हैं , तुम उनसे दूर रहा करो। यह हिंदू जहां भी मौका पढ़ेगा, भागकर सबसे पहले अपनी जान बचाऐंगे । यह अपने धर्म की बुराई सुन लेंगे पर दूसरे धर्मों की गलती को भी सर आंखों पर बिठाऐंगे।* *तीसरे होते हैं फ्रीज प्रवृत् के यानि मृतप्राय हिंदू । विरोधी संप्रदाय की भीड़ को देखकर ही इनके हाथ पांव ठंडे पड़ जाते हैं । इनके धर्म की इनके सामने बुराई करो या जूते मारो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता । इन्हें कुछ ले देकर धर्म परिवर्तन करवा लो तो भी तैयार हैं ।* *आप समझिए आप इन तीन में से किस में फिट होते हैं

घी और मोदी जी की कहानी

एक कहानी पूरी पढ़े जरूर कल घी लिया  650 रु किलो की दर से, पापाजी बोले कि हमारे समय मे तो इतने रु में काफी सैला घी आ जाता था, बिटिया गुन्नू नीचे साथ मे खड़ी थी वह बोली बाबा सैला यानि क्या उदाहरण देकर समझाओ, गुन्नू की बात सुन पापाजी शांत रह गए। बिटिया गुन्नू ने फिर पूछा  बाबा सैला क्या ? बाबा कुछ नही बोले, बस गुन्नू को लेकर ऊपर आ गए। ऊपर आकर वो शांति से बैठे  पानी पिया फिर बोले... बेटा गुन्नू सैला यानि बहुत। उदाहरण देकर कहूँ कि  हमारे समय मे इतने रु में  इतना घी आ जाता था कि पूरा मोहल्ला एक एक कटोरी घी पी लेता? गुन्नू बोली बाबा ये उदाहरण तो आप नीचे भी दे सकते थे? बेटा नीचे बहुत भीड़ थी और भीड़ को उदाहरण समझ नही आता है। गुन्नू बोली बाबा में समझी नही भीड़ को उदाहरण मतलब क्यो नहीं, बाबा बोले.... एक बार मोदी ने कहा था  कि विदेशो में हमारे देश का  बहुत पैसा जमा है? भीड़ ने कहा कि .....कितना? तो मोदी जी ने उदाहरण देकर समझाया था कि इतना कालाधन है कि पूरा पैसा अगर वापस आ जाए तो सभी के हिस्से में 15 -15 लाख ₹ आ जाए। बस सुनने वालों की भीड़  तभी से 15 लाख मांग रही है। और ये उदाहरण अगर में नीचे देता तो हो सकता ह कि कल कई लोग अपनी अपनी कटोरी लेकर घी माँगने आ जाते