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Saturday, 10 November 2018
पत्ती पड़ोसी ओर मूर्ति
पति काम से घर जल्दी आ गया। पत्नी ने यह देखा तो घबरा कर प्रेमी गुप्ता जी को पाउडर लगा कर, कोने में मूर्ति बनाकर खड़ा कर दिया। पति कमरे में आया तो उसने मूर्ती देखी और पूछा-: यह क्या है डार्लिंग..? पत्नी मुस्कुराते हुए बोली:जी, यह मूर्ति हमारे पड़ोसी गुप्ता जी ने दी है। पति कुछ ना बोला और काम काज में व्यस्त हो गया। पति आधी रात को उठ कर मूर्ति के आगे सेंडविच रखकर बोला-खा लो गुप्ता जी। परसों मैं भी तुम्हारे घर सारी रात ऐसे ही खड़ा रहा किसी ने पानी तक भी नहीं पूछा था।
Tuesday, 6 November 2018
सास बहू की नोकजोक
कहा बहू ने सास से, सम्मुख है त्यौंहार। करूँ कहाँ से मै शुरू, घर की झाड़ बुहार।। पहले कमरे को करूँ, या छत कर लूँ साफ। किंकर्तव्यविमूढ हूँ, करिये माँ इंसाफ।। सासू बोली बीनणी, मानो मेरी बात। मोबाइल को साफ कर, लगी रहे दिन रात।। टिनिन टिनिन घंटी बजे, प्रतिपल ये मैसेज। पीढ़ा लाने को कहूँ, तू लाती है मेज।। पानी माँगे लाडला, तू पकड़ाती चाय। मैनें माँगा बीजणा, मिला अंगौछा हाय।। आँख गड़ी है एकटक, खोया लगता गात। आती हूँ आयी अभी, सदा एक ही बात।। तू औ मेरा लाडला, दोनो की इक जात। आपस मे बोलो नहीं, मैसेंजर पर बात।। जिस दिन तेरे नेट का, खत्म होय बैलेंस। लगता तूने खो दिया, हो सारा ही सेंस।। अद्भुत पीड़ा रामजी, इससे मुझे बचाय। सवामणी करदूँ बहू, कहे नेट को बाय।। सास और बहू के बीच में झगड़ा सदियों से चलता आ रहा है सास और बहू में 99% झगड़े होते हैं और आजकल के ट्रेंडिंग युग में सास और बहू के ऊपर बहुत से जोक्स और चुटकुले बनाए गए हैं मगर यह भी सत्य है कि कुछ जगह में सास और बहू में कितना प्यार कितना प्रेम होता है कि एक दूसरे से अलग होने के बाद सास बहू को एक दूसरे की याद भी बहुत आती है वह भी नहीं पाती है तो इस कहानी के या इस कविता के माध्यम से कम सास बहू के अंदर जो झगड़ा होता है उसको नहीं बल्कि एक प्यार को दर्शा रहे कि किस तरह से राजस्थानी और खड़ी भाषा मारवाड़ी में यह कविता बनाई है तो आप इसका आनंद लीजिए और अगर यह कविता अच्छी लगे तो कृपया आगे से आगे शेयर करें और मारवाड़ी भाषा का सम्मान करें जय हिंद जय श्री राम जय वीर तेजाजी
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