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Thursday, 15 November 2018

एक गोत्र में शादी क्यो नही

एक दिन डिस्कवरी पर जेनेटिक बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था। उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा कि जेनेटिक बीमारी न हो, इसका एक ही इलाज है और वो है :- *"सेपरेशन ऑफ़ जींस"* ============= मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारों में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नहीं हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और एल्बोनिज्म होने की 100% सम्भावना होती है। *फिर बहुत ख़ुशी हुई, जब उसी कार्यक्रम में ये दिखाया गया कि आखिर "हिन्दूधर्म" में हजारों-हजारों वर्ष पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ?* ************ हिंदुत्व में गोत्र होते हैं और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नहीं कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहें.. ************************* *उस वैज्ञानिक ने कहा कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा कि "हिन्दूधर्म ही" विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है।* **************** हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क :- *1- कान छिदवानें की परम्परा :-* ************************* भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। *वैज्ञानिक तर्क -* दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है,जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है। *2- माथे पर कुमकुम/तिलक :-* ************************ महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है।कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है।इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है। *3 - जमीन पर बैठकर भोजन करना :-* ************************* भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है। *वैज्ञानिक तर्क -* पलती मारकर बैठना,एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो, तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही दिमाग से खुद-ब-खुद एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये। *4 - हाथ जोड़कर नमस्ते करना :-* ************************* जब किसी से मिलते हैं, तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं, तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते।अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। *5 - भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से :-* ************************* जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है,तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। *वैज्ञानिक तर्क -* तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं, इससे पाचन तंत्र ठीक से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है।इससे पेट में जलन नहीं होती है *6 - पीपल की पूजा करना :-* ******************** तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* पीपल की पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और वो उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन उत्सर्ज करता है। *7 - दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना :-* *************************दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है,तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आयेगा, पूर्वजों का स्थान है आदि - आदि । इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोना चाहिए। *वैज्ञानिक तर्क -* जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर,परकिंसन,या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है *8 - सूर्य को नमस्कार :-* ******************** हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते नमस्कार करने की परम्परा है। *वैज्ञानिक तर्क -* पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आँखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है *9 - सिर पर चोटी रखना :-* *********************** हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं *वैज्ञानिक तर्क -* जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है, उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता। सोचने की क्षमता बढ़ती है। *10 - व्रत रखना :-* ************** कोई भी पूजा-पाठ, त्यौहार होता है तो लोग व्रत रखते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों,मधुमेह,आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। *11 - चरण स्पर्श करना :-* हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें तो उसके चरण स्पर्श करें। यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं,ताकि वे बड़ों का आदर करें। *वैज्ञानिक तर्क -* मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है। इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं। इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक। *12 - क्यों लगाया जाता है सिंदूर ? :-* ************************* शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* सिंदूर में हल्दी,चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इससे स्ट्रेस कम होता है। *13 - तुलसी के पेड़ की पूजा :-* *********************** तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है। *वैज्ञानिक तर्क -* तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियाँ दूर होती हैं। हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क*एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..?* ================ *वैज्ञानिक कारण..* =========== एक दिन डिस्कवरी पर जेनेटिक बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था। उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा कि जेनेटिक बीमारी न हो, इसका एक ही इलाज है और वो है :- *"सेपरेशन ऑफ़ जींस"* ============= मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारों में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नहीं हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और एल्बोनिज्म होने की 100% सम्भावना होती है। *फिर बहुत ख़ुशी हुई, जब उसी कार्यक्रम में ये दिखाया गया कि आखिर "हिन्दूधर्म" में हजारों-हजारों वर्ष पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ?* ************ हिंदुत्व में गोत्र होते हैं और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नहीं कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहें.. ************************* *उस वैज्ञानिक ने कहा कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा कि "हिन्दूधर्म ही" विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है।* **************** हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क :- *1- कान छिदवानें की परम्परा :-* ************************* भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। *वैज्ञानिक तर्क -* दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है,जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है। *2- माथे पर कुमकुम/तिलक :-* ************************ महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है।कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है।इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है। *3 - जमीन पर बैठकर भोजन करना :-* ************************* भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है। *वैज्ञानिक तर्क -* पलती मारकर बैठना,एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो, तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही दिमाग से खुद-ब-खुद एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये। *4 - हाथ जोड़कर नमस्ते करना :-* ************************* जब किसी से मिलते हैं, तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं, तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते।अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। *5 - भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से :-* ************************* जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है,तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। *वैज्ञानिक तर्क -* तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं, इससे पाचन तंत्र ठीक से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है।इससे पेट में जलन नहीं होती है *6 - पीपल की पूजा करना :-* ******************** तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* पीपल की पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और वो उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन उत्सर्ज करता है। *7 - दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना :-* *************************दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है,तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आयेगा, पूर्वजों का स्थान है आदि - आदि । इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोना चाहिए। *वैज्ञानिक तर्क -* जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर,परकिंसन,या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है *8 - सूर्य को नमस्कार :-* ******************** हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते नमस्कार करने की परम्परा है। *वैज्ञानिक तर्क -* पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आँखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है *9 - सिर पर चोटी रखना :-* *********************** हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं *वैज्ञानिक तर्क -* जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है, उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता। सोचने की क्षमता बढ़ती है। *10 - व्रत रखना :-* ************** कोई भी पूजा-पाठ, त्यौहार होता है तो लोग व्रत रखते हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों,मधुमेह,आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। *11 - चरण स्पर्श करना :-* हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें तो उसके चरण स्पर्श करें। यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं,ताकि वे बड़ों का आदर करें। *वैज्ञानिक तर्क -* मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है। इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं। इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक। *12 - क्यों लगाया जाता है सिंदूर ? :-* ************************* शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। *वैज्ञानिक तर्क -* सिंदूर में हल्दी,चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इससे स्ट्रेस कम होता है। *13 - तुलसी के पेड़ की पूजा :-* *********************** तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है। *वैज्ञानिक तर्क -* तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियाँ दूर होती हैं। हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क

Monday, 12 November 2018

मेरे पिताजी और अल्टो गाड़ी

एक बार मैं घर के ऊपर बैठा था तो मैंने अपने पिताजी से बात की थी कि पिताजी आज के समय में एक फोर व्हीलर गाड़ी की बहुत ही ज्यादा घर पर जरूरत होती है तब मेरे पिता जी ने मुझसे कहा कि हां बेटे तुम्हारी बात बिल्कुल सही है सब मैंने पिताजी से बोला कि पिताजी क्यों ना हम एक फोर व्हीलर गाड़ी घर पर लेकर आए चाहे गाड़ी नहीं हो या सेकंड हैंड कम से कम हमारे घर के लिए वह अच्छी होगी तो पिताजी ने हां कर दी और मैंने एक सेकेंड हैंड गाड़ी देखने की सोच ली और मैंने कम से कम 50 गाड़ियां देखी किसी की रेट ज्यादा तो किसी की रेट कम जिसकी रेट ज्यादा थी वह गाड़ी अच्छी थी लेकिन जिसकी रेट कम थी उसके फीचर्स बहुत कम थी तो मैं बहुत हताश और परेशान हो गया था कि क्या किया जाए और इस तरह से गाड़ी को ली जाए क्योंकि गाड़ी सिर्फ एक बार ही लेनी है बार-बार गाड़ी ले नहीं सकते तो मेरे पिताजी ने मुझे सामने बैठाया और मुझे बोले कि देख बेटा तुझे गाड़ी लेना है तो ₹200000 गाड़ी में खर्च कर रहा है इसकी जगह तुला किया डेढ़ लाख रुपए और डाल दे तो गाड़ी नहीं आ जाएगी और बहुत ही शानदार गाड़ी आ जाएगी मैंने पिताजी की बात को दिल और दिमाग में छाप लिया था और घर पर नई गाड़ी लेकर आ गया और आज मुझे उस गाड़ी को लिए कम से कम 5 साल हो गए अभी तक कोई खर्चा नहीं हुआ है और हम पूरी फैमिली जहां तक घूमने जाना है वहां तक घूमने जा सकते हैं तो मैं सभी दोस्तों से यही कहूंगा कि अगर आपको भविष्य में फोर व्हीलर गाड़ी लेनी हो तो आप नई गाड़ी ले सकते जिससे प्रदूषण भी नहीं होगा और आपके हित में भी रहेगी खर्चा भी कम और घर के लिए अच्छी और लाभदायक और मुझे यह भी पता था कि मेरे पिताजी जब भी किसी फोर व्हीलर गाड़ी वाले को देखते थे तो उनके माइंड में एक सवाल जरूर पैदा होता था कि काश हमारे घर में भी एक छोटी सी कार हो तो मैं भी अपनी फैमिली को घुमाने के लिए या जहां कहीं भी जाना हो कार में लेकर जाऊं और हम सब एक साथ बैठकर जाए इंजॉय करें फैमिली को मजा भी आए तो मैंने पिताजी से बात भी की पिताजी ने हाथी की और पिताजी ने नाभि की लेकिन पिताजी के दिमाग में एक सवाल जरूर था कि आज अगर मैं फोर व्हीलर लेकर आऊं तो कल को क्या पता कि मेरा बेटा इस चीज का नाजायज फायदा ना उठा ले लेकिन मैं हमेशा मेरे पिता की तरफ कोई उंगली ना करें ऐसा कोई काम नहीं करता हूं और अंत में यह भी कहूंगा कि जीवन में कुछ ऐसा करो कि अपने पिता खुश हो जाए और मेरा एक सपना है कि मैं अपने पिताजी को फोर व्हीलर गाड़ी में बिठाकर घुमा और पेश करूं क्योंकि पिता है तो जहान है जय श्री राम धन्यवाद

Saturday, 10 November 2018

मृत्यु भोज ओर विधवा का दुःख

मृत्यु भोज का लुत्फ उठाने वालो... जो आप सजधज कर जीमण जीमने जाते हो ना.. तुम्हारे उसी *एक समय के जीमण की कीमत* आप तो मज़े से जीमण खा रहे होते हो.. लेकिन कभी उस विधवा औरत के बारे मे भी सोचा.. जो अब भी घर के अंधेरे कमरे मे किसी कोने में भरी गर्मी मे भी कम्बल ओढकर बैठी हुई है ..वो 8-10 दिनो से लगातार रो रही है और उसके आंसु सुखते तक नहीं है.. वो ना जाने कितने दिनों से भूखी होगी.. जिसे बाकी की सारी उम्र अपने पति के बिना सादगी से काटनी पड़ेगी... मृत्यु भोज का लुत्फ उठाने वालो.. उन बच्चों के बारे में भी सोचो.. जिनके सर से अपने बाप का साया उठ चुका है.. और जो हफ़्ते दस दिन से भूखे प्यासे आपके खाने पीने की ज़रूरतो को पुरा करने मे लगे हुए हैं.. इस मृत्यु भोज के लिए चाहे कर्ज ले या ज़मीन बेचे.. चाहे बच्चों की पढ़ाई छुटे या कम उम्र में ही मज़दुरी करनी पड़े.. पैसे तो उन्ही को चुकाने है.. आपको तो आपके जीमण से मतलब है..कभी उनकी आँखों मे आंखें डालकर देखना.. कर्ज़ चुकाने की टेंशन साफ दिखाई देगी.. अगर वाकई मे इंसान ही हो तो आंसुओं और मज़बुरियो से बना खाना छोड़ दो.. मैंने तो यह एहसास भी किया है कि एक बार मैं किसी के यहां मृत्यु भोज पर गया था तो मैंने देखा था कि जिस इंसान की मृत्यु हुई उस घर में उसके दो बच्चे थे जो पहला 6 साल का और दूसरा 4 साल का था और उसके घर परिवार में और कोई था नहीं तो आस पड़ोस के लोग ही वहां पर आकर बोल रहे थे कि लड्डू बनने चाहिए या बूंदी बननी चाहिए सब्जी यह नहीं होनी चाहिए साथ में तंदूरी होनी चाहिए सब लोग खाने को लेकर खुशियां मना रहे हैं जबकि जिस इंसान की मृत्यु हुई उसके बच्चों को तो इतनी भी समझ नहीं है कि उसने अपने पापा को खो दिया अपने सर से एक छत्रछाया या एक विचारों की छाया अब खत्म हो गई है लेकिन वह जो औरत है वह एक तरह से सुनना है उसके चाहे लोग कुछ भी करो या कुछ भी मत करो उसे कुछ लेना देना नहीं है क्योंकि वह अपने पति के बिरहा में इतनी पागल हो गई है उसे कुछ दिखाई नहीं देता और जिस दिन वह सदमे शुभ रहेगी तब तक उसको यह पता रहेगा कि उसके ऊपर कितना कर्ज हो गया है इतना दर्द हो चुका है कि उसके बच्चे अभी पढ़ाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि पढ़ाई करेंगे तो कर्ज नहीं चुका पाएंगे इसलिए उनको पढ़ाई से पहले ही काम धंधे पर लगा दिया जाता है और वह बच्चे किसी बॉस के तले दबे थे उनकी सोच भी रहती है और वह जीवन में आगे बढ़ नहीं पाते तो मैं यह समझूंगा कि यह जो सिस्टम है यह खत्म होना चाहिए यह जो सिस्टम है वह बंद होना चाहिए क्योंकि एक विधवा या 1 बच्चे जो है वह लाचार होते हैं मजबूर होते हैं क्योंकि यह सिस्टम बिल्कुल खराब है खुशी के मौके भी जिंदगी में खुब आते है.. तब खाओ ना, जी भरकर.. जितना खा सको......समाज के गणमान्य पँच वह मुख्य लोगों से हाथ जोङ कर विनती है कि म्रत्यु भोज बँद करने हेतु समाज मे आगे आये ..आप सभी महानुभावो की ये छोटी सी पहल हमारे समाज के युवा को कर्जदार होने से रोक सकती है अतः आप से पुनः विनती करता हु ..🙏कि ये पोस्ट आप सभी को ठीक लगे तो शेयर करना न भूले.....

मंदिर मस्जिद हिन्दू ओर मुस्लिम

क्या कोई हिंदू किसी भी मुस्लिम देश में मस्जिद बनाने पर रोक लगा सकते है, या फिर किसी ईसाई देश में चर्च बनाने पर रोक लगा सकते है,! नहीं लगा सकते ना! तो फिर क्यों इस देश में 80% हिंदुओं के होते हुए भी, हमेशा हिंदुओं को ही समझौता करना पड़ता है! क्यों हिन्दू बार-बार अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट जैसी घटिया न्याय व्यवस्था के आदेश को मानने पर विवश होते हैं! यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट जैसी घटिया न्याय व्यवस्था पर ही वामपंथी कुत्ते कब्ज़ा करके बैठ गए है, जो एक हिरण और मासूम इंसानों के हत्यारे सलमान को तो बरी कर देती है, श्रीकृष्णा पर भद्दी टिप्पणी करने वाले घटिया प्रशांत भूषण पर कोई कार्यवाही नहीं होती! लेकिन दूसरी तरफ कमलेश तिवारी को पैगंबर पर टिप्पणी करने के आरोप में जेल में डाल देती है! साध्वी प्रज्ञा असीमानंद जैसे हजारों बेकसूर हिंदुओं पर कार्रवाई की जाती हैं! पैटल गन पर रोक लगाई जाती है लेकिन उन कश्मीर के जिहादी सुअरो के हमलो से देश के सैनिकों की रोज होने वाली मौत पर इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता! अरे आग लगाओ ऐसी घटिया न्याय व्यवस्था को आखिर तुम हिंदू ही ऐसी घटिया न्याय व्यवस्था पर क्यों निर्भर रहे! हिंदू और मुस्लिम लोगों के बीच में आपको एक अंतर हमेशा से देखने को मिलेगा कि मुसलमान आपको हर बात के लिए नीचे दिखाएंगे आपको हर चीज के लिए नीचे दिखाएंगे वह यह आपके साथ में बताएंगे कि हिंदू जो है वह नीच होते हैं हिंदू जो होते हैं वह क**** होते हैं हिंदू जो होते हैं वह ह**** होते हैं जबकि यह सब उल्टा होता है क्योंकि मुस्लिम वर्ग किस चीज हिंदू के साथ में कभी वफादारी नहीं कर सकते वह हमेशा उन को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और समाज में गंदगी फैलाते हैं मैंने तो एक उदाहरण योगी आदित्यनाथ का देखा था और मैं उनका सपोर्ट भी करता हूं क्योंकि एक बार योगी आदित्यनाथ ने जब अजान हो रही थी और उधर उनका भाषण होने वाला था तो उन्होंने अजान को बंद करवा दिया था क्योंकि दिल की आरती भी तो जरूरी होती है तो इस तरह के स्वाद कभी-कभी होने भी चाहिए क्योंकि मंदिर मस्जिद हिंदू-मुस्लिम यह संवाद कभी बंद नहीं होने वाला है अगर इनको बंद करना है तो किसी ना किसी को आगे कदम बढ़ाना है और हम सब हिंदुओं को एक पत्र जरूर हो जाना है और मैं तो यह भी कहूंगा कि अगर कोई हिंदू मुसलमान के प्रति दबकर रहता है या मुसलमान के नीचे रहता है तो वह हिंदू कभी ऊपर नहीं आ सकता और एक सच यह भी है कि अगर एक मुसलमान ने अगर हिंदुओं के बीच में एक दुकान खरीद ली तो आने वाले कुछ समय के बाद यह संभव भी हो जाएगा कि 10 दुकानों के बीच में पहले एक दुकान मुसलमान और 9 दुकान हिंदू की होती थी लेकिन अभी आप देखोगे कि 9 दुकान मुसलमान की ओर एक हिंदू की होती है और उसी हिंदू तो बहुत जुल्म और बहुत अत्याचार करते हैं तो मैं सभी हिंदू भाइयों से यह अपील करूंगा कि अगर आपने इस पोस्ट को देखा है क्या इस पोस्ट को पड़ा है तो आप मुसलमानों के प्रति गलत रवैया भले ही मत अपनाया लेकिन हिंदुत्व के प्रति एकजुट होकर अपने देश के लिए अपने धर्म के लिए और अपनी जाति के लिए एकत्रित हो जाए तभी में हम सबकी भलाई के जय श्री राम हिन्दुओ एकत्र हो जाओ, एकता में ही शक्ति है ।

Tuesday, 6 November 2018

हिन्दू ओर तीन जानवर

*लड़ाई या कठिन परिस्थिति में घिर जाने पर जानवर क्या करते हैं ?* *आईये मनोविज्ञान के अध्ययन के द्वारा इसे जानने की कोशिश करें ।* *खतरे में फंस कर जानवर तीन तरह से व्यवहार करते हैं, फाईट, फ्लाईट या फ्रीज।* *फाईट यानि लड़ना , जिसे कहते हैं, मुसीबत का डटकर मुकाबला करना ।* *फ्लाईट यानि भाग जाना । जिसे कहते हैं दुम दबाकर डरकर भाग जाना ।* *फ्रीज यानि वहीं जड़ हो जाना । जिसे कहते हैं, डर से लकवा मार जाना ।* *लड़ाई में आमना सामना होने पर कुछ जानवर लड़ना पसंद करते हैं । जैसे, शेर, भालू, हाथी आदि। चाहे दुशमन कैसा भी ताकतवर क्यों न हो, यह भिड़ जाते हैं ।* *कुछ जानवर जब ताकतवर या हिंसक जानवर से घिर जाते हैं तो जान बचाने के लिए भागना पसंद करते हैं । जैसे कि, हिरण, खरगोश, बकरी आदि।* *अब तीसरे तरह के जंतु भी होते हैं । यह जब खतरा देखते हैं तो शांत बैठ जाते हैं । जैसे कि शतुरमुर्ग खतरा देखकर रेत में सिर छुपा लेता है । कबूतर के पास यदि बिल्ली आ जाए तो अपनी आंख बंद कर लेता है। यह सोचते हैं कि मेरे आंख बंद कर लेने से मुसीबत टल जाएगी । पर वह नहीं टलती व बिल्ली शांत बैठे कबूतर को ग्रास बना लेती है ।* * हिंदू भी इन तीन प्रकार के होते हैं ।* *फाईट प्रवृति वाले यानि कट्टर हिंदु। जोकि जानते हैं विदेशी ताकतों जैसे कि इसलाम व इसाई धर्म ने हमको हिंदुस्थान में ही दबाना शुरू कर दिया है ।अतः कट्टर हिंदू इनसे अपने धर्म या जीवन को बचाने के लिए संघर्ष करते हैं । यह दूसरे धर्म की बुराईयों की बात करने से नहीं डरते।* *दूसरे होते हैं फ्लाईट या कायर हिंदू, जिन्हें हम सेकुलर कहते हैं । यह कहीं भी आमना सामना होने पर सेकुलरिज्म की दुहाई देंगे व अपनी कायरता को सेकुलर के आवरण में छुपाने का प्रयास करेंगे। यह कहेंगे कि मुसलमान तो एसे ही होते हैं , तुम उनसे दूर रहा करो। यह हिंदू जहां भी मौका पढ़ेगा, भागकर सबसे पहले अपनी जान बचाऐंगे । यह अपने धर्म की बुराई सुन लेंगे पर दूसरे धर्मों की गलती को भी सर आंखों पर बिठाऐंगे।* *तीसरे होते हैं फ्रीज प्रवृत् के यानि मृतप्राय हिंदू । विरोधी संप्रदाय की भीड़ को देखकर ही इनके हाथ पांव ठंडे पड़ जाते हैं । इनके धर्म की इनके सामने बुराई करो या जूते मारो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता । इन्हें कुछ ले देकर धर्म परिवर्तन करवा लो तो भी तैयार हैं ।* इस कहानी से तात्पर्य किसी भी हिंदू भाइयों के दिल को ठेस पहुंचाना नहीं है बल्कि यह कहानी तो किसी भी हिंदू भाइयों के दिल को झकझोर कर उनके दिल में जो एक डर है उसको बाहर निकाल कर एक निडर होने की भावना को उद्धृत करते हुए यह है अद्भुत करती है कि हिंदुओं में तीन प्रकार की जो जानवर ता पाई जाती है जवाब जो मूर्खता पाई जाती है वह किस तरह से होती है वह तीनों ही चीजें इसमें बताई गई है तो हमें इस चीज को हमेशा पॉजिटिव लेना है और जो कमी है उसको बाहर निकालना है और अच्छाई को अंदर लेना है जबकि नेगेटिव कोई भी चीज को हमें बीच में नहीं लाना है और मैं सभी हिंदू भाइयों से निवेदन करूंगा अपील करूंगा कि हमें अपने अंदर के उन तीन जानवरों को मारना है जो हमें सिर्फ आलस लाचारी और नौकरों के अलावा कुछ नहीं देते और हमें जीवन में आगे बढ़ते रहना है तो जय श्री राम जय हिंदुत्व जय भगवा

Sunday, 4 November 2018

दीवाली घर पे मनाये

अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....* बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं सामान से नहीं, समय देकर सम्मान जताते हैं उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं *चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....