Tuesday, 30 October 2018

महेंदी ओर महजब एक सच

बेहद सावधान शहरों में जगह जगह हाई प्रोफाइल localities में कम उम्र, वयस्क युवतियां और महिलाएं आपको मेहंदी लगवाती दिख जाएंगी ! करवाचौथ और त्यौहारी सीजन में तो इतनी भीड़ हो जाती है कि मेहंदी लगाने वाले लड़के मुँह मांगे पैसे वसूल करते हैं ! आज ही मैंने देखा कि 4 लड़के 4 लड़कियों के हाथों में मेहंदी लगा रहे थे और काफी स्मार्ट और मेन्टेन लग रहे थे ! मेरी समझ में ये नहीं आया कि क्या उन स्मार्ट पड़ी लिखी लड़कियों को ये नही दिखता कि गली गली यूँ मेहँदी लगाने वालों के पास इतना सजने सवरने के लिए समय और पैसा कहाँ से आता होगा । या इनके पास पैसा है तो ये छोटा सा काम क्यों कर रहे हैं । 4 लड़के मेहँदी लगा रहे थे मैं इस तरह वहाँ खड़ा हो गया कि वो लड़के मुझे किसी युवती का भाई या कोई रिश्तेदार समझें ! एक युवक ने मेहंदी लगाने के बाद युवती से कहा कि "आपका हाथ गज़ब लग रहा है मैडम ", युवती शर्मा गई और युवक ने आँखों-आँखों में मुस्कान फेंकी ! और कुछ न कुछ ऐसे बोलना कि वो नव योवनाएं उनसे प्रभावित हों। फिर युवती गदगद मन से शायद 200 रु देकर मेहंदी लगा हाथ सँभालते हुए रवाना हो गई ! शहरी क्षेत्र में अनेक इंजीनियरिंग और एमबीए की स्टूडेंट्स पीजी के रूप में रहती हैं, मेरे समझ के बाहर की बात है कि अपने शहर से दूर पढ़ने के लिए आई युवती को मेहंदी और सौंदर्य प्रसाधनों की आवश्यकता क्यों है ? बहरहाल मैंने चारों लड़कों से उनके नाम पूछे । लड़के हिचकिचाये, कुछ और नाम बताये, मैंने कहा कि ID दिखाओ, ID में लड़कों के नाम, चारों नाम गौर से पढ़िए :-1.रुसलान 2.अलतमष 3.मुज़म्मिल 4.वहीद ! साथियों, हमारी बेटियों बहनो का हाथ पकड मेहंदी लगाते यह शातिर शिकारी लोग इन भोली-भाली बच्चियों को किधर मोड़ ले जाएं, कुछ मालूम नहीं !! मेरे समझ के बाहर का विषय है कि अब घर में माँ बहन और बेटी एक दूसरे के हाथ में मेहंदी क्यों नहीं लगा सकती ? बाहर जाकर मेंहदी लगवाना कौनसा फैशन है ? लव जिहाद की शुरुआत यहीं से होती है

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